2023 Arghya offered to the setting sun, Why and how is Chhath Puja performed?

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2023 Arghya offered to the setting sun, Why and how is Chhath Puja performed?

2023 डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य, छठ पूजा

2023 Arghya offered to the setting sun, Why and how is Chhath Puja performed?

INDIA/ News reporter Rajesh Wasanwal/ 19/11/2023/ Ratlam

2023 डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य,

छठ पूजा क्यों कैसे की जाती है?

2023 Arghya offered to the setting sun, Why and how is Chhath Puja performed?

छठ पूजा क्यों कैसे किस कारण से की जाती है 2023 शुभ समय

INDIA/ उत्तर भारतीयों का सबसे बडा महापर्व छठ पूजा जो की दीपावली के पश्चात उत्तर भारतीय परिवार अपने परिवार सहित मानते हैं छठ पूजा का अपना एक अलग महत्व है छठ पूजा के लिए उत्तर भारतीय डूबते सूर्य को अर्थ देकर नदी किनारे या किसी बड़े तालाब के किनारे इकट्ठा होकर भगवान सूर्य देव को नमस्कार प्रणाम करते हैं और उनसे अपने परिवार की खुशियों के संबंध में मनोकामना मांगते हैं।

छठ पूजा के लिए उत्तर भारतीय महिलाएं भजन कीर्तन वी अपनी लोक भाषा में भगवान सूर्य देव को मनाने के लिए भी भजन गाती है गीत गाती है उत्तर भारतीय इस छठ पूजा को बड़े ही धूमधाम से मनाते हैं

भगवान सूर्य देव को शांति समय में अर्थ देकर उनकी पूजा अर्चना की जाती है दीप जलाए जाते हैं एक विशेष टोकरी के अंदर पूजन सामग्री जैसे कि फल मिष्ठान नारियल गाना वस्त्र आदि सामग्रियों को रखकर भगवान सूर्य देव को अर्थ दिया जाता है और उनसे पूरे परिवार की खुशियों के संबंध में मनोकामना मांगी जाती है।

कुछ वर्षों में छठ पूजा का महत्व मध्य प्रदेश राजस्थान गुजरात महाराष्ट्र छत्तीसगढ़ आदि प्रदेशों में भी इसका महत्व बढ़ गया है क्योंकि उत्तर भारतीय परिवार अन्य राज्यों में निवास करने लगे हैं छठ पूजा को मनाने के लिए दूर दराज से भी परिवार अपने मूल गांव की ओर प्रस्थान करते हैं इस समय समस्त ट्रेन बेस भरपूर भरी हुई नजर आती है कारण यही रहता है कि उन्हें छठ पूजा किए जाने हेतु अपने गांव की ओर जाना रहता है।

किस प्रकार की जाती है छठ पूजा और क्या होता है इसका शुभ फल दाई कारण

माना जाता है कि छठ पर्व में श्रद्धा भाव से की गई पूजा अर्चना से पूजा अर्चना करने वाले साधक या परिवार के जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है डूबते हुए भगवान सूर्य देव को अर्थ दिया जाता है उनकी दीप जलाकर आरती उतारी जाती है और अपने परिवार की सुख समृद्धि दीर्घायु और स्वास्थ्य में वृद्धि होती रहे ऐसी मनोकामना भी मांगी जाती है छठ पूजा करने वाले परिवार में संतान को भी दीर्घायु स्वस्थ जीवन की प्राप्ति होती रहे ऐसी मनोकामना मांगी जाती है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी प्रकार की मनोकामना की पूर्ति या असाधि रोग से मुक्ति के लिए कोसी भरने का संकल्प भी लिया जाता है।

2023 Arghya offered to the setting sun, Why and how is Chhath Puja performed?

छठ पूजा का आयोजन उत्तर भारतीय रीति रिवाज और समारोहों के साथ होता है क्योंकि इसमें उगते और ढलते सूरज के सामने तमाम तरह के फल और अनाज से बने पकवानों का अर्थ भी दिया जाता है छठ पूजा का अपना एक अलग ही भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी है कई बार इसको पर्यावरण के संरक्षण से भी जोड़ा जाता है।

पहले दिन उत्सव की शुरुआत औपचारिक शुद्धिकरण का दिन होता है नहाने के बाद घर पर शुद्ध भोजन बनाया जाता है एवं पूजा के लिए पारंपरिक मिठाइयां स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए जाते हैं दूसरे रोज पूजन करने वाले उपवास रखने वाला परिवार शाम को सूर्य देव को मीठे चावल या खीर का भोग लगाया जाता है छठ पूजा का व्रत बिना पानी के शाम ढलने के बाद व्रत को पूर्ण किया जाता है उगते और डूबते सूर्य को पूजन करने का विशेष महत्व है तीसरे रोज संध्या अर्ध छठ पूजा का मुख्य दिन होता है जिसमें नदियों के या बड़े तालाब के किनारे पूजन अर्चना किया जाता है नए कपड़े पहने जाते हैं पानी में खड़ा होकर भगवान सूर्य देव को अर्थ दिया जाता है और भगवान सूर्य देव को फल और फूल जल मिष्ठान आदि अर्पित किए जाते हैं और मनोकामना पूर्ण करने के लिए भगवान सूर्य देव को नमन किया जाता है अगले दिन सूर्य देव उगाने के पहले नदी के किनारे इकट्ठे होते हैं और उगते सूर्य को अर्थ देते हैं इसके साथ छठ पूजा समाप्त मानी जाती है यही है छठ पूजा का महत्व और पारंपरिक छठ पूजा जिसे उत्तर भारतीय बड़ी ही धूमधाम से गाजे बाजे के साथ मनाते हैं।

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